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दानवीर कर्ण: महाभारत का श्रापित योद्धा | Abby Viral x Abhay Nirbheek (Official Lyrics)

महाभारत का वो योद्धा, जिसे दुनिया ने हमेशा ‘सूत-पुत्र’ कहकर ठुकराया, लेकिन जिसकी दानवीरता के सामने स्वयं इंद्र भी नतमस्तक हो गए।

महाभारत के इतिहास में कर्ण एक ऐसा चरित्र है, जिसकी वीरता और नियति (Fate) के बीच हमेशा संघर्ष रहा। वह कुंती का ज्येष्ठ पुत्र था, पर पांडवों का शत्रु कहलाया। वह दुनिया का सबसे महान धनुर्धर बन सकता था, पर उसे पग-पग पर श्राप मिले।

एब्बी वायरल (Abby Viral) और अभय निर्भीक (Abhay Nirbheek) की जोड़ी ने इस महागाथा को एक नए कलेवर में पेश किया है। यह रैप सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि कर्ण के उस स्वाभिमान और बलिदान की कहानी है, जो आज भी ‘रश्मिरथी’ के पन्नों में अमर है।

चाहे दुर्योधन की दोस्ती हो या कवच-कुंडल का दान, इस रैप का एक-एक शब्द कर्ण के उस संघर्ष को बयां करता है जिसे सदियों तक न्याय नहीं मिला।

नीचे पढ़िए ‘दानवीर कर्ण – महाभारत का श्रापित योद्धा’ रैप के पूरे बोल (Lyrics):

धीर-वीर गंभीर करना था युद्ध नीति का ज्ञानी
वीर ना उसके जैसा, कोई ना उसके जैसा था दानी
तीर चलाता बिजली सा, वो शस्त्रों का अभ्यासी
वाणी से शस्त्रार्थ करे तो लगता था संयासी
आसमान तक शोर मचाए विजय धनुष तांकार
सारे तीर करण के सीधे गिरते जाकर सागर पार
ज्ञान का ना ही बल का करता था वो तानिक घमंड
शान भर में ही कर देता दुश्मन के अंगीन खंड
रण-कौशल में उसके जैसा, जग में कोई नहीं था
दुनिया के लाखों प्रश्नों का उत्तर सिर्फ वही था
रण थल का आभूषण था वो, धरती का सम्मान
पन्नों में अपने इतिहास के, वो है वीरों की पहचान
जब कर्ण चला समरंगण में, अर्जुन का तेज परखने
तीरों पे जब तीर चले, फिर पांडव लगे तड़पने
कुरुक्षेत्र में स्वाद युद्ध का, चखने और चखाने
अंग राज रधेया चला, अब रण कौशल दिखलाने
महावीर जब रथ पर चढ़कर, समर भूमि में आया
पांडव सेना पर घिर आई, भय की काली छाया
भागो-भागो प्राण बचाओ, हर कोई चिल्लाया
माधव के अतिरिक्त ना समझा कोई कर्ण की माया
केशव बोले सुनो पार्थ, तुम समय ना व्यर्थ गवाओ
विजय चाहते हो तो पहले अपना बाण चलाओ
दुर्योधन आया है करने, मानवता का मर्दन
किंतु कर्ण की मुठी में है, मृत्यु की भी गर्दन
कर्ण खड़ा है दुर्योधन के, प्रति कर्तव्य निभाने
युद्ध भूमि में दानवीर, आया है कर्जचुकाने
सूत पुत्र यह सूर्य वीर, अब किंचित नहीं झुकेगा
इसके विजय धनुष से, बाणों का अब हमला नहीं रुकेगा
अग्निकुंड में गई सामन, वो युद्ध भसम कर देगा
जीत ताज का दुर्योधन के, मस्तक पर धार देगा
कौन्तेय ने प्रत्यंचा पर, ज्यों ही बाण चढ़ाया
शेर से क्रोधित सूर्य पुत्र, को अपने सम्मुख पाया
अर्जुन बोला सूत पुत्र, मैं तेरे प्राण हरूंगा
धर्म राज के चरणों में, गौरव का ताज धरूंगा
पांचाली की आंखों में, अब आंसू नहीं रहेंगे
अभिमन्यु के आज हत्यारे, जीवित नहीं बचेंगे
शांत हुई वह अग्नि लगी थी, लक्षाग्रह आंगन में
सिर्फ रक्त से आग बुझेगी, धड़क रही जो आंखों में
अर्जुन की बातों को सुनकर, फिर अंग राज ये बोला
मैंने जिसको योधा समझा, निकला बालक भोला
वीर पुरुष यूँ शब्दों से लोगों को नहीं डराते
योधा अपने पौरुष का गौरव नहीं गिराते
सच्चे योधा शब्द त्याग कर शास्त्र से बातें करते
भुजदंडों के दम पर ही वो दुनिया का ताम हरते
युद्ध भूमि में परखा जाता, रण का कौशल सारा
समरंगण ही तय करता है, कौन काल से हारा
लगे बाण पर बाण बरसाने, युद्ध हुआ तब भीषण
राह पतन की लेकर आया, मृत्यु वाला सीज़न
आसमान में विद्युत जैसे बादल लगे कड़कने
दोनो वीरों के भीतर की ज्वाला ऐसे लगी भड़कने
रण भूमि से दूर नगर के नर नारी चिल्लाए
कुरुक्षेत्र के महाप्रलय से, ईश्वर आज बचाए
तभी कर्ण के रथ का पहिया दल-दल में था आया
बलशाली अश्वों ने अपना पूरा ज़ोर लगाया
लेकिन कर्ण की किस्मत को कुछ भी स्वीकार नहीं था
पहिया बाहर आ ना सका था, अब तक धंसा वहीं था
धनुष रखा तब कर्ण निहत्था, रथ से नीचे आया
अर्जुन ने भी बाण रोक कर, क्षत्रिय धर्म निभाया
लेकिन कृष्ण वही खड़े थे उसी वक़्त वो बोले
अर्जुन के मन में फिर कैसे रोप रहे थे शोले
परशुराम का दिया हुआ अभिशाप व्यर्थ न जाए
कर्ण की वो ब्रह्मास्त्र की विद्या कैसे दिए भुलाए
युद्ध भूमि में उंच-नीच तुम अर्जुन नहीं बिछारो
सूर्य पुत्र की छाती पर अब अंतिम बाण उतारो
सूर्य पुत्र की छाती पर अब अंतिम बाण उतारो
माधव के वचनों को सुनकर अर्जुन कुछ सकुचाया
दिव्य शक्तियों को आमंत्रित कर गांडीव उठाया
शास्त्र हीन पर लक्ष्य साध कर अर्जुन ने शर छोड़ा
तीर कर्ण को मार विजय रथ को फिर ऐसे मोड़ा
मिली पराजय, किंतु कर्ण ने जय को गले लगाया
रवि का बेटा देह त्याग कर, रवि में पुनः समाया
दांशीलता का दानी से हुआ आज अतिरेक
देह दान कर किया कर्ण ने मृत्यु का अभिषेक
ज्ञानी दानी वीर धनुर्धार, विदा हुआ था आज
धर्म राज के सिर पर आया कुल का रक्तिम ताज
धर्म राज के सिर पर आया कुल का रक्तिम ताज
हाहाहा कुल का रक्तिम ताज